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post authorjitendar nayyar 07 Nov 2026 659

 नहीं रहे यूकेडी के पूर्व विधायक डॉ. नारायण सिंह जंतवाल.

नैनीताल। उत्तराखंड ने अपना एक ऐसा नेता खो दिया, जिसने अलग राज्य के सपने को हकीकत में बदलने के संघर्ष में अहम भूमिका निभाई थी। नैनीताल के पूर्व विधायक और उत्तराखंड राज्य आंदोलन के प्रमुख नेताओं में शामिल डॉ. नारायण सिंह जंतवाल का 66 वर्ष की उम्र में आकस्मिक निधन हो गया। उनके निधन की खबर से प्रदेशभर में शोक की लहर है।
जानकारी के अनुसार, डॉ. नारायण सिंह जंतवाल नियमित स्वास्थ्य जांच के लिए दिल्ली गए थे। इसी दौरान उन्हें दिल का दौरा पड़ा और उनका निधन हो गया। उनके पार्थिव शरीर को नैनीताल लाया जा रहा है। उनके परिवार में पत्नी सावित्री जंतवाल और दो बेटियां हैं। उनकी पत्नी कुमाऊं विश्वविघालय में प्रोफेसर हैं। डॉ. जंतवाल उत्तराखंड गठन के बाद वर्ष 2002 में हुए पहले विधानसभा चुनाव में नैनीताल सीट से विधायक निर्वाचित हुए थे। वह उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) के संस्थापक सदस्यों में शामिल थे। प्रदेश की क्षेत्रीय राजनीति को मजबूत करने और उत्तराखंड के मुद्दों को राजनीतिक मंच पर उठाने में उनकी अहम भूमिका रही। उनका राजनीतिक सफर छात्र राजनीति से शुरू हुआ था। डीएसबी परिसर में उन्होंने छात्रसंघ के उप सचिव, सचिव और अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी निभाई। इसके बाद वह छात्र महासंघ के अध्यक्ष भी रहे।अलग राज्य के संघर्ष में जेल तक जाना पड़ा
डॉ. नारायण सिंह जंतवाल की पहचान केवल एक पूर्व विधायक के रूप में नहीं थी। वह उत्तराखंड राज्य आंदोलन के उन सक्रिय नेताओं में शामिल थे, जिन्होंने अलग राज्य की मांग को लेकर सड़कों पर संघर्ष किया। उनके निधन से उत्तराखंड की राजनीति और राज्य आंदोलन से जुड़े एक महत्वपूर्ण व्यक्तित्व का साथ छूट गया है।