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post authorjitendar nayyar 22 Dec 2025 795

एलिवेटेड रोड़ परियोजना से उत्पन्न समस्याओं को लेकर सौपा ज्ञापन.

देहरादून। बस्ती बचाओ आन्दोलन ने आज एलिवेटेड रोड़ से जुड़ी समस्याओं को लेकर जिलाधिकारी कार्यालय पहुंच कर तहसीलदार सदर सुरेन्द्र देव के माध्यम से डीएम को ज्ञापन प्रेक्षित किया। ज्ञापन ने प्राप्त करते हुये तहसीलदार सदर ने आवश्यक कार्यवाही का आश्वासन दिया।
आज प्रातः 11 बजे के लगभग बस्ती बचाओ आन्दोलन से जुड़े बस्तीवासी संयोजक अनन्त आकाश के नेतृत्व मे कचहरी रोड स्थित जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे जहां उन्होंने कहा की प्रस्तावित रिस्पना-बिन्दाल एलिवेटेड रोड़ परियोजना से रिस्पना -बिन्दाल के प्रभावित लोग खुश नहीं हैं, उनका स्पष्ट कहना है कि सरकार ने उनके साथ वादा खिलाफी की है। स्वयं मुख्यमंत्री ने स्थानीय निकाय चुनाव 025 में लोगों को आश्वस्त किया था कि उन्हें बिस्थापित नहीं किया जायेगा। चुनाव जीतने के कुछ समय बाद ही एलिवेटेड रोड़ परियोजना यह कर स्वीकृत की गई कि इससे देहरादून की यातायात व्यवस्था सुधरेगी तथा जाम की समस्या होगी। कुछ बर्ष पहले देहरादून को स्मार्ट सिटी बनाने की परियोजना लागू कर यह कहा गया कि यह योजना देहरादून को व्यवस्थित करेगी तथा इस आढ़ में हजारों पेड़ों को काटा गया, करोड़ो करोड़ खर्च हुये नतीजा सबके सामने हैं। ज्ञापन में कहा गया है कि देहरादून को अतिक्रमण मुक्त करने के नाम पर जगह-जगह निम्न मध्यवर्गीय परिवारों, मेहनत कश, झुग्गी झोपडियों तथा फुटपाथ व्यवसासियों को लक्षित कर अभियान चलाया जा रहा है, बड़े व प्रभावशाली लोगों को हर स्तर पर छूट है। ज्ञापन में कहा गया है कि रिस्पना-बिन्दाल के सन्दर्भ में हाईकोर्ट एवं राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के दिशानिर्देशों एवं चिन्ताओं के बावजूद भी एलिवेटेड रोड़ जैसी भीमकाय परियोजना को लाकर जहाँ पर्यावरण को भारी क्षति पहुंचेगी वहीं हजारों परिवारों पर बिस्थापन का खतरा बना हुआ है ,इस जद में सर्वाधिक समाज का कमजोर हिस्सा प्रभावित हो रहा है, जिनका दुखड़ा सुनने वाला कोई नहीं है। ज्ञापन में कहा गया है कि सरकारी आंकड़ों के अनुसार एलिवेटेड परियोजना पर 6200 करोड़ का खर्च है जिसमें रिस्पना मे 11 किलोमीटर बिन्दाल में 15 किलोमीटर सड़क का निर्माण होना 2500 से अधिक पेड़ कटने, लगभग 25 हजार लोगों का बिस्थापन होना, जिसमें रिस्पना में लगभग 1 हजार तथा बिन्दाल 15 सौ मकान है जबकि वास्तविकता इससे हटकर है ।कई भवनों ,बाढ़ में भवनों को तो सर्वे सूची में रखा हि नहीं गया है। ज्ञापन में कहा गया है कि जनसुनवाई के दौरान प्रभावितों द्वारा जो आपत्तियां लगाई गई उन पर भी कोई ध्यान नहीं दिया गया। ज्ञापन में कहा गया है कि, सरकार एवं जिलाप्रशासन ,नियोजकों द्वारा पर्यावरणविदों ,जानकारों के सुझावों  को दरकिनार किया गया जिसमें उन्होंने पर्यावरण, देहरादून में बढ़ रही प्राकृतिक आपदाओं तथा मसूरी ,धनोल्टी में भी इस रोड़ दुष्प्रभाव की ओर ध्यान आकर्षित किया था । महोदय, इस सन्दर्भ में व मालिकाना हक की मांग को लेकर तमाम बस्तियों से 1लाख हस्ताक्षर एकत्रित किये जा रहे हैं जो आने वालों दिनों मुख्यसचिव महोदय को दिये जायेंगे । ज्ञापन देने वाले प्रमुख लोगों में संयोजक अनन्त आकाश, महिला समिति उपाध्यक्ष नुरैश अन्सरि ,विप्लव अनन्त, सुबेदार बगसिंह, माला, सुनीता, सुरेशी,फरीदा, कमरजहां, खालिक, इमरन, महेश पूर्वे, दिनेश कुमार, पुष्पा, प्रमिला सरिक आदि बडी संख्या में प्रभावित शामिल थे ।